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दिल के अरमां आंसुओं में बह गए

By SHYAM NARAYAN RANGA - Monday, October 26, 2026 No Comments

नगर निगम चुनाव की घोषणा से पहले बीकानेर में मेयर पद के दावेदारों की कमी नहीं थी। कांग्रेस हो या बीजेपी, दोनों ही दलों में कई नेता खुद को भावी मेयर के रूप में देखने लगे थे। लेकिन जैसे ही मेयर पद और वार्डों की आरक्षण लॉटरी निकली, कई दावेदारों के राजनीतिक अरमानों पर पानी फिर गया—और उनके दिल के अरमां आंसुओं में बह गए।


बीकानेर नगर निगम में मेयर का पद सामान्य वर्ग के लिए अनारक्षित रहा है। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि दोनों प्रमुख दल अब सामान्य वर्ग के किसी नेता को ही मेयर पद के लिए आगे कर सकते हैं। ऐसे में ओबीसी और अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले वे नेता, जो अब तक मेयर पद की दावेदारी ठोक रहे थे, अचानक असहज नजर आने लगे हैं।


हालांकि उनमें से कुछ नेता यह तर्क देते जरूर सुनाई दे रहे हैं कि अनारक्षित का मतलब ओपन फॉर ऑल है और कोई भी चुनाव लड़ सकता है, लेकिन अंदरखाने वे भी जानते हैं कि राजनीतिक समीकरण अब सामान्य वर्ग के दावेदारों के पक्ष में झुक सकते हैं। नतीजतन, कई नेताओं ने फिलहाल मेयर बनने के सपने को किनारे रखकर पार्टी के लिए काम करने की भूमिका स्वीकार कर ली है।


वार्डों की आरक्षण लॉटरी ने भी कई बड़े दावेदारों की गणित बिगाड़ दी। सामान्य वर्ग के कई ऐसे नेता, जो मेयर पद की दौड़ में खुद को मजबूत मान रहे थे, उस समय सकते में आ गए जब उनका अपना वार्ड किसी अन्य वर्ग के लिए आरक्षित हो गया। अब उनके सामने दो ही रास्ते बचे हैं—या तो किसी दूसरे वार्ड से अपनी दावेदारी की संभावनाएं तलाशें, या फिर अपने किसी समर्थक को चुनाव मैदान में उतारकर राजनीतिक पकड़ बनाए रखें।


दोनों ही दलों में इस बार एक बात लगभग तय मानी जा रही है कि टिकट उसी व्यक्ति को मिलेगा, जिसका संबंधित वार्ड में मजबूत आधार और स्थानीय जुड़ाव हो। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष भी साफ कर चुके हैं कि पार्टी इस बार वार्ड के बाहर के व्यक्ति को टिकट देने के पक्ष में नहीं है। ऐसे में उन नेताओं की मुश्किलें और बढ़ गई हैं, जिनका अपना वार्ड आरक्षित हो चुका है और दूसरे वार्ड में उनकी पकड़ सीमित है।


कुल मिलाकर, बीकानेर का यह निकाय चुनाव कुछ नेताओं के लिए सत्ता तक पहुंचने का अवसर जरूर बनेगा, लेकिन कई दावेदारों के लिए यह चुनाव निराशा का सबब भी साबित हो सकता है। टिकट की आस, मेयर बनने का सपना और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की लंबी कतार—आरक्षण की लॉटरी ने कई समीकरण एक झटके में बदल दिए हैं।


अब देखना यह होगा कि जिनके अरमान लॉटरी में बह गए हैं, वे पार्टी के साथ कितनी मजबूती से खड़े रहते हैं और कौन अपने राजनीतिक भविष्य के लिए नया रास्ता तलाशता है।


श्याम नारायण रंगा


यह आलेख न्यूज कास्ट समाचार पत्र में 2026 के नगर निगम चुनावों के दौरान छपा था।

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