
बीकानेर में खाने पीने के शौकीनों की कमी नहीं है। ऐसे शौकिन लोगों के हजारों किस्से शहर में सुनने को मिलते हैं। उनमें से एक किस्सा है अपने जमाने के मारजा {शिक्षक} अगरिया मारजा व मीन मारजा का। ये दोनों ही मारजा मेरे दादाजी श्री रामनारायण रंगा के मामाजी थे और ये किस्सा मैंने अपने दादाजी से ही सुना था।
अगरिया मारजा व मीन मारजा दोनों सगे भाई थे और उस समय बीकानेर शहर के सेठ साहूकार अपने घरों में शादीयों में, त्यौंहारो में, मृत्यु के अवसर पर और जयंती और पुण्यतिथि पर ब्राह्मण जाति के लोगों को रूक्का {परची} देकर खाने पर बुलाया करते थे। इन रूक्का से खाने पर जाने वालों की एक पीढी आज भी शहर में है। अगरिया मारजा व मीन मारजा को एक अवसर पर किसी माहेष्वरी जाति के घर से ऐसा खाने का निमंत्रण रूक्का प्राप्त हुआ और दोपहर के समय दोनों मारजा भाई डटकर खाना खाकर
अपने पुष्तैनी चौक मूॅंधड़ा चौक के पाटे पर आ कर लेट गए। गर्मी का मौसम होने के कारण पसीने भी आ रहे थे और ज्यादा खाने के हाल बेहाल था।चूंकि खाने के दोनों भाई जबरदस्त शौकिन थे और खाना लजिज बना था इसलिए छक कर खाया भी। शरीर तो अपनी सीमाओं में रहता है और ज्यादा खाने के कारण दोनों भाईयों के पेट में खिंचवा हो गया और एक भाई दूसरे के पेट पर हाथ फेरने लगा और थोड़ी देर बाद दूसरा भाई पहले के पेट पर हाथ फेर लेता था। हाथ फेरते वक्त उनके मुॅंह से ‘खाया पीया भस्मा भूत’ का उच्चारण भी हो रहा था। उन्हें देखकर यह सहज ही अनुमान लगाया जा सकता था कि आज मारजा भाई कहीं जमकर पेट पूजा करके आए हैं। उसी दौरान उस रास्ते से अपने जमाने के प्रसिद्ध वैद्य रामीराम व्यास जी निकले तो मारजा भाईयों से पूछ लिया कि क्या बात है आज मारजा ऐसे कैसे लेटे हो। तो अगरिया मारजा ने कहा कि आज किसी सेठ के जीमकर आए हैं। तो मीन मारजा ने पूछ लिया कि वैद्य जी कुछ ज्यादा ही खा लिया और पानी भी पीया नहीं जा रहा तो कोई उपाय बताओ कि जल्दी पच जाय और पानी की तलब शांत हो। चूंकि रामीराम जी वैद्य ऐसे हालातों के आदी थे तो उन्होंने मजाक में कह दिया कि पानी नहीं पीया जा रहा तो बर्फ का छोटा टूकड़ा मुॅह में निगल लो घीरे घीरे रिस कर पानी पेट में चला जाएगा। उसी समय अगरिया मारजा बोल पड़े कि वैद्य जी इतनी जगह ही नहीं है और ऊपर कंठ तक फुल पैक है, बर्फ के टुकड़े जितनी जगह होती तो एक लड्डू ही खा लेता। इतना सुनना था कि वैद्य जी सहित सभी लोग हंस पड़े और वापस सुनाई देने लगा ‘खाया पीया भस्मा भूत’।
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