Flash

वाद

By SHYAM NARAYAN RANGA - Thursday, July 2, 2015 No Comments
ये रचना मैनंे 01.05.97 को तब लिखी थी तब लिखी थी जब मैं श्री जैन पी जी महाविद्यालय बीकानेर में वाणिज्य तृतीय वर्ष का छात्र था। उस समय मेरी उम्र 21 साल की थी।

वादों से घिरा देष टूट रहा है आज,
वहीं उग्रवाद, कहीं अलगाववाद, कहीं आतंकवाद।
इन वादों ने खोखला कर दिया है वतन को,
मिलकर उजाड़ दिया है इस प्यारे चमन को।
वादों की इस आग में इंसानियत भी मर गई,
इस आग की लपट मानवता को बिखेर गई।
भाई भाई लड़ रहा है बन के शैतान,
क्यों नहीं समझता वो खून का रंग है एक समान।
बुझा को इस आग को बचा लो मेरे देष को,
एक हो जाओ तुम सब मिटा दो क्लेष को।

श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’
पुष्करणा स्टेडियम के पास,
नत्थूसर गेट के बाहर,
बीकानेर - 334004
मोबाईल 9950050079

Tags:

No Comment to " वाद "