ये रचना मैनंे 20.03.95 को तब लिखी थी तब लिखी थी जब मैं श्री जैन पी जी महाविद्यालय बीकानेर में वाणिज्य प्रथम वर्ष का छात्र था। उस समय मेरी उम्र 19 साल की थी।
आज की व्यवस्था की, हालत है थोड़ी खस्ता,
कहीं भ्रष्टाचार व महंगाई, नहीं कहीं भी कोई सस्ता।
कैसी है ये व्यवथा !!
चपरासी से लेकर मैनेजर तक लूट रहे हैं देष को,
राजनेता भी कर रहे हैं अपना काम आहिस्ता, आहिस्ता,
पुलिस बनी है चोर किया रिष्वत का धंधा,
आम जनता भी पिस रही है कोई तो बचाओ,
आगे आओ युवकों जुल्म के खिलाफ आवाज उठाओ,
तभी देष आगे बढ़ेगा, तभी नया भारत बनेगा।
श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’
पुष्करणा स्टेडियम के पास,
नत्थूसर गेट के बाहर,
बीकानेर - 334004
मोबाईल 9950050079
आज की व्यवस्था की, हालत है थोड़ी खस्ता,
कहीं भ्रष्टाचार व महंगाई, नहीं कहीं भी कोई सस्ता।
कैसी है ये व्यवथा !!
चपरासी से लेकर मैनेजर तक लूट रहे हैं देष को,
राजनेता भी कर रहे हैं अपना काम आहिस्ता, आहिस्ता,
पुलिस बनी है चोर किया रिष्वत का धंधा,
आम जनता भी पिस रही है कोई तो बचाओ,
आगे आओ युवकों जुल्म के खिलाफ आवाज उठाओ,
तभी देष आगे बढ़ेगा, तभी नया भारत बनेगा।
श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’
पुष्करणा स्टेडियम के पास,
नत्थूसर गेट के बाहर,
बीकानेर - 334004
मोबाईल 9950050079
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