ये रचना मैनंे 25.07.95 को तब लिखी थी तब लिखी थी जब मैं श्री जैन पी जी महाविद्यालय बीकानेर में वाणिज्य प्रथम वर्ष का छात्र था। उस समय मेरी उम्र 19 साल की थी।
अपने अश्क न बहाना मेरी याद में,
ये मोती कहीं बिखर न जाए,
अपना दिल न दुखाना मेरी चाह में,
ये दर्पण कहीं टूट न जाए।
मैं तो एक सपना हूॅं, न तुम्हारा हूॅं न अपना हूॅं,
नींद मंे ही टूट जाऊंगा,
तुम जाग जाना अपनी याद में,
ये दुनिया कहीं छूट न जाए,
अपने अश्क न बहाना मेरी याद में ये मोती कहीं बिखर न जाए।
मैं तो एक राह हूॅं कभी यहां हूॅं कभी वहां हॅं,
तुम चलते जाना राह पर,
मंजिल कहीं छूट न जाए,
अपने अश्क न बहाना मेरी याद में ये मोती कहीं बिखर न जाए।
श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’
पुष्करणा स्टेडियम के पास,
नत्थूसर गेट के बाहर,
बीकानेर - 334004
मोबाईल 9950050079
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| Shyam Narayan Ranga |
अपने अश्क न बहाना मेरी याद में,
ये मोती कहीं बिखर न जाए,
अपना दिल न दुखाना मेरी चाह में,
ये दर्पण कहीं टूट न जाए।
मैं तो एक सपना हूॅं, न तुम्हारा हूॅं न अपना हूॅं,
नींद मंे ही टूट जाऊंगा,
तुम जाग जाना अपनी याद में,
ये दुनिया कहीं छूट न जाए,
अपने अश्क न बहाना मेरी याद में ये मोती कहीं बिखर न जाए।
मैं तो एक राह हूॅं कभी यहां हूॅं कभी वहां हॅं,
तुम चलते जाना राह पर,
मंजिल कहीं छूट न जाए,
अपने अश्क न बहाना मेरी याद में ये मोती कहीं बिखर न जाए।
श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’
पुष्करणा स्टेडियम के पास,
नत्थूसर गेट के बाहर,
बीकानेर - 334004
मोबाईल 9950050079

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