ये रचना मैंने 5.1.94 को लिखी जब मैं राजस्थान बाल मंदिर स्कूल में सीनियर हायर सैकेण्डरी वाणिज्य वर्ग का विद्यार्थी था। उस समय मेरी उम्र 18 साल की थी और मेरी यह रचना जब मैंने आज देखी पढ़ी तो मेरे मन मंे आया कि शायद कोई था जिसके लिए यह रचनाएं लिखी गई होगी। उम्मीद है पंसद आएगी और नहीं भी आए तो पढ़ लेना भाई शायद खुद को स्कूल का समय याद आ जाए।
चंचल नयन और गोरे गाल,
कर दिया इन्होंने मेरा हाल बेहाल,
कमसिल उम्र और सुनहरे बाल,
जिस पर मैं फिदा हुआ वो है उनकी चाल ।
देखकर उनको मैं तो खो गया,
न जाने मुझे क्या हो गया।
वो क्या सोच रहे हैं ये मैं कैसे जानूं,
उनका इस तरह मुझे देखना मैं क्या मानूं।
वो तो कुछ कहते नहीं ये हम कैसे सहेंगे,
उनसे कुछ कहलाएंगे या जीएंगे या मरेंगे।
मेरा उनसे है अनुरोध कुछ तो कहें,
और कहीं नहीं मेरे दिल में रहें।
श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’
नत्थूसर गेट के बाहर
पुष्करणा स्टेडियम के पास
बीकानेर {राजस्थान} 334004
मोबाईल 9950050079
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| Shyam Narayan Ranga श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’ |
चंचल नयन और गोरे गाल,
कर दिया इन्होंने मेरा हाल बेहाल,
कमसिल उम्र और सुनहरे बाल,
जिस पर मैं फिदा हुआ वो है उनकी चाल ।
देखकर उनको मैं तो खो गया,
न जाने मुझे क्या हो गया।
वो क्या सोच रहे हैं ये मैं कैसे जानूं,
उनका इस तरह मुझे देखना मैं क्या मानूं।
वो तो कुछ कहते नहीं ये हम कैसे सहेंगे,
उनसे कुछ कहलाएंगे या जीएंगे या मरेंगे।
मेरा उनसे है अनुरोध कुछ तो कहें,
और कहीं नहीं मेरे दिल में रहें।
श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’
नत्थूसर गेट के बाहर
पुष्करणा स्टेडियम के पास
बीकानेर {राजस्थान} 334004
मोबाईल 9950050079

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