बचपन से ही कुछ ना कुछ लिखकर रख लेने की आदत थी फिर स्कूल समय से ही रचनाएॅं लिखता रहा हूॅं। आज काफी समय बाद मौका मिला अपने ब्लाॅग पर इन रचनाओं को आप सबके सम्मुख रखने का तो मेरा यह बचपन का प्रयास आप सबके सामने रख रहा हूॅं। इन्टरनेट के इस युग में जो है जैसा है बिना सम्पादित रखने का अधिकार सबको मिला है बस आपसे निवेदन है कि पढ़ते वक्त यह याद रखे कि जब मैंने यह लिखा जब मेरी उम्र 17 साल की थी और दिनांक 21.1.1993 को लिखा गया था और उस समय मैं राजस्थान बाल मंदिर स्कूल में जूनियन हायर सैकेण्डरी वाणिज्य वर्ग का विद्यार्थी था।
हम सो रहे हैं आज क्यूं नहीं जागते
क्यों हम आज सत्यता से दूर भागते
हो गई आज धराषायी मस्तिष्क की बुद्धि
ले नहीं रहे हैं हम अपने आप की सुद्धि
स्वार्थ है भरा मन में दिल हमारा सो रहा
क्यो मनुष्य अपने भाग्य को रो रहा
खो गई चेतना उसकी खो गया उसका अभिमान
मृत हो गया है वो जैसे बिना तीर का कमान
चेतना में आकर विकास अपना करो
मानवता को लेकर निर्माण भारत का करो।
श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’
नत्थूसर गेट के बाहर
पुष्करणा स्टेडियम के पास
बीकानेर
मोबाईल 9950050079
हम सो रहे हैं आज क्यूं नहीं जागते
क्यों हम आज सत्यता से दूर भागते
हो गई आज धराषायी मस्तिष्क की बुद्धि
ले नहीं रहे हैं हम अपने आप की सुद्धि
स्वार्थ है भरा मन में दिल हमारा सो रहा
क्यो मनुष्य अपने भाग्य को रो रहा
खो गई चेतना उसकी खो गया उसका अभिमान
मृत हो गया है वो जैसे बिना तीर का कमान
चेतना में आकर विकास अपना करो
मानवता को लेकर निर्माण भारत का करो।
श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’
नत्थूसर गेट के बाहर
पुष्करणा स्टेडियम के पास
बीकानेर
मोबाईल 9950050079
No Comment to " चेतना "
Post a Comment