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चेतना

By SHYAM NARAYAN RANGA - Friday, June 26, 2015 No Comments
बचपन से ही कुछ ना कुछ लिखकर रख लेने की आदत थी फिर स्कूल समय से ही रचनाएॅं लिखता रहा हूॅं। आज काफी समय  बाद मौका मिला अपने ब्लाॅग पर इन रचनाओं को आप सबके सम्मुख रखने का तो मेरा यह बचपन का प्रयास आप सबके सामने रख रहा हूॅं। इन्टरनेट के इस युग में जो है जैसा है बिना सम्पादित रखने का अधिकार सबको मिला है बस आपसे निवेदन है कि पढ़ते वक्त यह याद रखे कि जब मैंने यह लिखा जब मेरी उम्र 17 साल की थी और दिनांक 21.1.1993 को लिखा गया था और उस समय मैं राजस्थान बाल मंदिर स्कूल में जूनियन हायर सैकेण्डरी वाणिज्य वर्ग का विद्यार्थी था।



हम सो रहे हैं आज क्यूं नहीं जागते
क्यों हम आज सत्यता से दूर भागते
हो गई आज धराषायी मस्तिष्क की बुद्धि
ले नहीं रहे हैं हम अपने आप की सुद्धि
स्वार्थ है भरा मन में दिल हमारा सो रहा
क्यो मनुष्य अपने भाग्य को रो रहा
खो गई चेतना उसकी खो गया उसका अभिमान
मृत हो गया है वो जैसे बिना तीर का कमान
चेतना में आकर विकास अपना करो
मानवता को लेकर निर्माण भारत का करो।



श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’
नत्थूसर गेट के बाहर
पुष्करणा स्टेडियम के पास
बीकानेर
मोबाईल 9950050079

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