बचपन से ही कुछ न कुछ लिखने पढ़ने का शौक रहा है और पता नहीं क्या लिखता था बस लिख लेता था। ये जो कुछ भी मैं नीचे आपके सम्मुख प्रस्तुत कर रहा हूॅ वो मेरी रचना है पता नहीं कविता है या क्या है पर है बचपन के श्याम नारायण रंगा की लिखी कुछ लाईनें। यह लाईनें 12.11.92 को तब लिखी जब मेरी आयु 17 वर्ष थी और मैं राजस्थान बाल मंदिर स्कूल में कक्षा जूनियर हायर सैकेण्डरी वाणिज्य वर्ग का विद्यार्थी था।
सुबह जहां मनोरम होती,
शाम जहां शीतलता लाती,
कही रेत के टीले हैं तो कहीं रेत के टीले हैं तो कहीं बर्फ है ठण्ड फैलाती
कहीं सिक्खों का भंगड़ा है तो कहीं गाते गीत गुजराती
मैं तो कहता जय जय भारती जय भारती जय जय भारती ।
श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’
पुष्करणा स्टेडियम के पास,
नत्थूसर गेट के बाहर,बीकानेर।
मोबाईल 9950050079
सुबह जहां मनोरम होती,
शाम जहां शीतलता लाती,
कही रेत के टीले हैं तो कहीं रेत के टीले हैं तो कहीं बर्फ है ठण्ड फैलाती
कहीं सिक्खों का भंगड़ा है तो कहीं गाते गीत गुजराती
मैं तो कहता जय जय भारती जय भारती जय जय भारती ।
श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’
पुष्करणा स्टेडियम के पास,
नत्थूसर गेट के बाहर,बीकानेर।
मोबाईल 9950050079
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